जुलाई के महीने में ट्विटर पर #BabyPenguin बहुत ट्रेंड हुआ।

चित्र: गूगल

समित ठक्कर नाम के एक व्यक्ति ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उनके बेटे आदित्य ठाकरे और ऊर्जा मंत्री नितिन राउत को लेकर एक ट्वीट किया जिसके चलते समित के खिलाफ़ FIR दर्ज की गई।

चित्र: गूगल

FIR के बाद भी समित का वही स्टैंड रहा और लोगों ने भी समित को सपोर्ट करते हुए इसे खूब ट्रेंड किया।

आलम ये है कि आज तक समित का आदित्य ठाकरे को बेबी पेंग्विन कहना जारी हैं। लोगों में भी अब आदित्य ठाकरे बेबी पेंग्विन के नाम से ही ज़्यादा पॉपुलर हैं।

आदित्य ठाकरे को बेबी पेंग्विन कहने के पीछे कहानी ये है कि शिव सेना द्वारा संचालित बृहन्मुम्बई म्युनिसिपल कारपोरेशन (BMC) ने 2012 में लोकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए मुंबई के Byculla ज़ू के लिए Humboldt पेंगुइन्स को मंगवाने का फैसला किया। ऐसी खबरें हैं कि इसके लिए शिव सेना ने BMC पर दबाव बनाया था। उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे का ये महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट जल्द ही एक बड़ी कंट्रोवर्सी की वजह बन गया। तमाम विरोधों के बावजूद आखिरकार जुलाई 2016 में साउथ कोरिया से 8 Humoldt पेंग्विन Byculla ज़ू पहुंचे। इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत थी कोई 10 करोड़ रुपये जिसके तहत उन पेंग्विन्स के लिए ज़ू में एक आर्टिफिशियल एनवायरनमेंट बनाया जाना था। लेकिन यहां आने के कुछ दिनों के अंदर ही उन 8 पेंग्विन्स में से एक की बैक्टीरियल इंफेक्शन के चलते मौत हो गई। इस बात पर भी बहुत कॉन्ट्रोवर्सी हुई। एक्सपर्ट्स के मुताबिक वातावरण में हुए अचानक बदलाव और ज़ू प्रशासन के पास ऐसे एगज़ोटिक पक्षियों की देखरेख को लेकर कोई ट्रेनिंग, संसाधन और जानकारी न होने के कारण उस पेंग्विन की मौत हुई। कई विशेषज्ञों ने भारत जैसे गरम देश मे उन पेंग्विन्स को लाना ही एक ग़लत निर्णय बताया। बाद में उन पेंग्विन्स से पैदा हुए एक और पेंग्विन की मौत हो गई। कुल मिलाकर यह एक अपरिपक्व कदम था जिससे नुकसान ही ज़्यादा हुआ – फ़िर चाहे वो नुकसान आर्थिक हो, पेंग्विन्स की जान का हो या आदित्य ठाकरे की इमेज का।